महाभारत के वो रोचक किस्से जो आपने ना तो देखे होंगे और ना ही कही सुने होंगे

महाभारत यानी की हमारे देश के इतिहास में एक ऐसा अध्याय जो हर किसी के जुबान में हैं| महाभारत में क्या हुआ, कैसे हुआ, कब हुआ, ये सब बातें जनमानस में आम है| हर कोई इसके बारे में जानता है| कृष्ण, अर्जुन, दुर्योधन, द्रोणाचार्य से हर कोई परिचित है| लेकिन कुछ बातें ऐसी हैं जो आपने किसी सीरियल में नहीं देखी होंगी और ना ही आपने पढ़ी होंगी जैसे की-

 

  • एकलव्य के बारे में सब जानते हैं लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं की एकलव्य, श्रीकृष के भाई थे| एकलव्य भी वासुदेव के पुत्र थे जो की जंगल में खो गए थे और इसके बाद उनका लालन पालन हिरण्यधनु ने किया था| एकलव्य वही है जिन्होंने अपना अंगूठा काटकर अपने गुरु को दिया था|

 

  • आज के समय में टेस्ट ट्यूब बेबी का चलन है लेकिन हमारे संस्कृति में महाभारत काल से ही ऐसा होता आ रहा है| गुरु द्रोणाचार्य पहले टेस्ट ट्यूब बेबी थे| कथा कहती है की द्रोण के पिता महर्षि भारद्वाज एक बार नदी में स्नान कर रहे थे तो उन्हें घृताची नाम की अप्सरा दिखाई दी और उसके सम्मोहन से भारद्वाज के शरीर से शुक्राणु निकल गए| इसके बाद द्रोण का जन्म हुआ|

 

  • हमे लगता है की सभी कौरवों ने पांड्वो के साथ गलत किया जबकि ऐसा नहीं है| सभी कौरव पांडवो के खिलाफ नहीं थे| युयुत्सु और विकर्ण ने हमेशा दुर्योधन के कामो की आलोचना की जबकि वो भी एक कौरव थे| उन्होंने युद्ध का पूरा विरोध किया था और चाहते थे युद्ध ना हो| इसके अलावा उन्होंने द्रौपदी के चीरहरण का बहुत विरोध किया लेकिन भाई का साथ देने के चलते वो युद्ध में शहीद हो गए|

 

  • दुर्योधन कितना भी कुकर्मी रहा हो लेकिन वो वचन का बहुत अधिक पक्का था| दुर्योधन ने अपनी पत्नी भानुमती को वचन दिया था की वो कभी दूसरी शादी नहीं करेगा और उसने ऐसा ही किया| नहीं तो उस समय पर दो या उससे अधिक शादियाँ करना आम बात थी और ऐसा होता था| अपने वचन के चलते ही उसने द्रौपदी के स्वयंवर में भाग नहीं लिया था| इसके अलावा उसने अर्जुन को वो पांच तीर भी दे दिए थे जो उसे भीष्म के द्वारा पांडवो का वध करने को मिले थे| अर्जुन ने एक बार गंधर्व से दुर्योधन की जान बचाई थी और उसके बदले में फिर अर्जन ने युद्ध के समय वो तीर मांग लिए|

 

  • हम सबको पता है की महाभारत जैसे महान ग्रन्थ को वेदव्यास ने लिखा था लेकिन बहुत कम लोगो को पता है की वो महाभारत के एक पात्र भी थे| कथा के अनुसार ऋषि पराशर ने सत्यवती को देखकर उनसे सम्बन्ध बनाने की इक्षा जाहिर की लेकिन उससे पहले सत्यवती ने एक वचन लिया की उनका पुत्र महान ऋषि होगा| पराशर ने वचन दिया और इसके बाद जब सत्यवती ने पुत्र को जन्म दिया तो उसका नाम कृष्ण द्वैपायन रखा गया जो की बाद में वेदव्यास बना|

 

  • जब पांडवो के पिता पांडू मरने वाले थे तो उन्होंने कहा की उनके पुत्र उनका मश्तिष्क खा जाएँ जिससे उन्हें संसार का ज्ञान हो जाए| किसी ने उनकी बात नहीं सुनी लेकिन सहदेव ने ऐसा किया| मष्तिष्क का पहला गास खाने पर उसे संसार में हो चुकी चीजो की जानकारी हुई, दूसरा खाने पर वर्तमान और तीसरा खाने पर भविष्य का ज्ञान हो गया|

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